Glories of Harinam. | परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज

10/12/24, 5:58 pm – Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *Glories of Harinam.*

Highlights from the discourse of *His Holiness Srila Nava Yogendra Swamiji Maharaj*

Mangal Aarti sermon*

Date: *December 8th, 2024, ISKCON Amritsar.*

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Everyone is in ignorance. One must come out of ignorance and *purify one’s existence.*

*By chating Harinam, one must purify one’s conscience.*

*Of all the living entities with material bodies in this world, one who got awarded this human form should not work hard day and night simply for sense gratification*

*It is available even for dogs and hogs who eat feces. One must engage in penance and austerity to attain the divine position of devotional service. By doing so, the heart becomes pure. Having achieved this position, one attains eternal, blissful life, transcendental to material happiness, which continues forever.* (_SB 5.5.1_)

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13/12/24, 5:01 am – Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *प्रचार के लिए विद्वता चाहिए या विनम्रता?*

*परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज* के प्रवचन से मुख्य अंश

*रविवारीय सत्संग।*

दिनांक:- *दिसंबर 8, 2024, इस्कॉन जालंधर।*

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*कलियुग में केवल नाम जपने से जीव का कल्याण हो जाता है।*

हम सब भगवान के अंश हैं। यह शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा सनातन है। *हम इस मनुष्य शरीर में आत्मा को पहचानने के लिए आए हैं, और यह केवल (भगवान श्री) कृष्ण की शरण में आने से ही संभव होगा।*

*हमारा जो संबंध भगवान से टूट गया है, हमें उसे पुनः स्थापित करना है।*

*हमें इस संसार से वैराग्य और (भगवान श्री) कृष्ण के चरणों में अनुराग करना है।*

*भगवान चैतन्य महाप्रभु, जो स्वयं कृष्ण हैं, की भविष्यवाणी – इस पृथ्वी के हर नगर-ग्राम में मेरे नाम का प्रचार होगा, (श्रील) प्रभुपाद ने कार्यान्वित कर दिखाया। (श्रील) प्रभुपाद ने सारी दुनिया में भगवान का प्रचार किया है।*

प्रचार के लिए विद्वत्ता भी चाहिए, लेकिन पहले हमें विनम्र बनना है।

*ममैवांशो जीवलोके जीवभूत: सनातन:।*

*मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥* _(भगवद गीता 15.7)_

*दो बातन को भूल मत, जो चाहत कल्याण।*

*नारायण इक मौत को, दूजे कृष्ण भगवान।।*

*ब्रजेंद्र-नंदन जेइ, शचि-सुता होइलो सेई,*

*बलराम होइलो निताई।*

*दीना-हिना जाता चिलो, हरि-नाम उद्धारिलो,*

*तारा साक्षी जगाई मधाई॥*

*नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।*

*न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥* _(भगवद गीता 2.23)_

*यारे देख , तारे कह ‘ कृष्ण ‘ – उपदेश।*

*आमार आज्ञाय गुरु हञा तार ‘ एइ देश॥* _(चैतन्य चरितामृत मध्यलीला 7.128)_

*मलिन मन की हर बात बेकार है।*

*हरिनाम ही सार है।*

*महाप्रभु आधार हैं।*

*माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।*

*आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर॥*

*हमें लाख न करोड़ न हज़ार चाहिए।*

*हमें श्याम जी, हमें कृष्ण जी, तुम्हारा बस प्यार चाहिए।*

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