How can one become fearless? | परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज

21/01/25, 5:26 am – Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *How can one become fearless?*

Highlights from the discourse of *His Holiness Srila Nava Yogendra Swamiji Maharaj*

*Mangal Aarti Sermon*

Date: *January 18th, 2025, ISKCON Udhampur.*

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One is born in a human body. Eating, sleeping, satisfying the senses, and protecting oneself are the same in humans and animals. *Humans can follow Dharma. The Lord’s rules are Dharma. One who is devoid of Dharma is like an animal.*

One takes birth and dies repeatedly. One is repeatedly suffering in the womb of the mother. It is due to the bad influence of this world. To escape from this (suffering), one must worship (Lord) Murari.

Many devotees have been rescued by the effect of Harinam, like Ganika, Sudama, and Ajamil. *Everyone must take the help of Harinam.*

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21/01/25, 5:26 am – Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *गृहस्थ आश्रम में किस प्रकार रहना चाहिए?*

*परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज* के प्रवचन से मुख्य अंश

*कुलदीप जी के घर में सत्संग।*

दिनांक:- *जनवरी 18, 2025, घर पर प्रवचन, उधमपुर।*

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*भगवान ने हम पर कृपा करके अपने शुद्ध भक्त (श्रील) प्रभुपाद को इस पृथ्वी पर भेजा।* सिर्फ सात (७) डॉलर लेकर (श्रील) प्रभुपाद अमेरिका गए थे, और सत्तर (७०) साल की उम्र में उन्होंने पूरी दुनिया में केंद्र स्थापित कर दिए।

*जिन्होंने कभी कृष्ण का नाम नहीं सुना था, वह सब कृष्ण के लिए पागल हो गए। यह शुद्ध संत (श्रील प्रभुपाद) का प्रभाव है।*

*कृष्ण अवतार नहीं, अवतारी हैं। बाकी अवतारों के कारण कृष्ण हैं। हमें अपने जीवन का केंद्र भगवान श्री कृष्ण को बनाना है। हमें कृष्ण भक्ति करनी है, और अपने आप को कृष्ण के चरणों में समर्पित करना है।*

जीवन का उद्देश्य भगवान की प्राप्ति करना है।

हम कृष्ण को केवल भक्ति से ही जान सकते हैं।

*हमें कौमार अवस्था (बचपन) से ही भक्ति करनी चाहिए। यह मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है। अन्य शरीरों की भांति यह शरीर भी नश्वर है, लेकिन फिर भी अर्थपूर्ण है। इस शरीर के द्वारा ही हम (भक्ति करके) भगवान को प्राप्त कर सकते हैं।*

तीन आश्रम (ब्रह्मचारी, संन्यासी और वानप्रस्थ) का भार गृहस्थ आश्रम पर होता है।

*हमें हमेशा उठते, बैठते, खाते और सोते हुए भगवान का नाम लेना चाहिए, इसमें कोई देश और काल का नियम नहीं है।*

*कृष्ण भुलिया जीव, भोग-वाञ्छा करे।*

*पाशते माया, तारे झापटिया धरे॥*

*ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।*

*मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥* _(भगवद गीता 15.7)_

*जीवेर ‘स्वरूप’ हय—कृष्णेर ‘नित्य-दास’।*

*कृष्णेर ‘तटस्था-शक्ति’ ‘भेदाभेद-प्रकाश’॥* _(चैतन्य चरितामृत मध्यलीला 20.108)_

*एते चांशकलाः पुंसः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।*

*इन्द्रारिव्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे युगे॥* _(श्रीमद्भागवत महापुराण 1.3.28)_

*कर लो भजन श्रीकृष्ण का, यह काम आएगा।*

*छूटेंगे धन व जन, मगर यह साथ जाएगा॥*

*कबीरा सब जग निर्धना ,धनवंता न कोय।*

*धनवंता सोइ जानिये, राम नाम धन होय॥*

*इतना जप कर कि हद कर दे।*

*कि यमराज भी अपना खाता रद्द कर दे॥*

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