24/01/25, 6:05 pm - Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *How should one behave towards other devotees?*

Highlights from the discourse of *His Holiness Srila Nava Yogendra Swamiji Maharaj*

*Mangal Aarti Sermon*

Date: *January 22nd, 2025, ISKCON, Udhampur.*

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One should not sleep in Satsang. It is a big offense.

By the grace of the Guru, one can get rid of this material bondage and attain (Lord Sri) Krishna's grace.

The best way to progress in the devotional path is to worship at the feet of Guru Maharaj.

*The Supreme Lord resides (located) in the heart of all living entities, O Arjuna.*

*He is causing all living entities to act as if sitting on a machine placed under the spell of material energy.* (_BG 18.61_)

*Only the person who has a pure heart can find me.*

*I do not like deceit and fraud.* (_Sri Ramcharitmanas, Sundar Kand, verse 44_)

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24/01/25, 6:05 pm - Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *भगवान हमारी हर इच्छा को पूरा करते हैं।*

*परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज* के प्रवचन से मुख्य अंश

*मंगल आरती प्रवचन।*

दिनांक:- *जनवरी 23, 2025, इस्कॉन उधमपुर।*

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*विषय-विकार हमें भगवान से दूर कर कर रहे हैं। हम सब शरीर के स्तर पर आ गए हैं। हम शरीर नहीं आत्मा है। हमें आत्मा के स्तर पर आने के लिए इस शरीर से कार्य लेना है।*

कथा-वाचक को कथा पैसे के लिये नहीं, अपितु भगवान की प्रसन्नता के लिए करनी चाहिए।

हमें भगवान की शरण में जाना है। *भगवान के हाथों में जीवन की डोर सौंपनी है। भगवान शरणागत वत्सल हैं। जब हम उनके शरण में होंगे, तब वह (जीवन के अंत में हमें) संभाल लेंगे। हमें नवधा भक्ति करनी है - श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, साख्य, और आत्मनिवेदन।*

शौच के बाद लिंग में एक बार, गुदाद्वार में तीन बार, बायें हाथ में दस बार, फिर दोनों हाथों में सात बार तथा दोनों पैरों में तीन बार पृथक् मिट्टी लगानी और धोनी चाहिये - मनुस्मृति, दक्षस्मृति, विष्णुस्मृति, विष्णुपुराण, नारदपुराण।

शौच का यह विधान गृहस्थों के लिये है। ब्रह्मचारियों के लिये इससे दुगुने, वानप्रस्थियों के लिये तिगुने और संन्यासियों के लिये चौगुने शौच का विधान है - मनुस्मृति, विष्णुपुराण, नारदपुराण।

दिन में जो शौच का विधान है, उससे आधा रात में करना चाहिये। रोगियों के लिये उससे आधा और यात्रा में उससे भी आधे शौष का नियम है - वाधुलस्मृति।

*यारे देख, तारे कह 'कृष्ण' - उपदेश।*

*आमार आज्ञाय गुरु हञा तार ' एइ देश॥* _(चैतन्य चरितामृत मध्यलीला 7.128)_

*धन यौवन यों जायगो, जा विधि उड़त कपूर।*

*नारायण गोपाल भजि, क्यों चाटे जग धूर॥* _(अनुराग रस, श्लोक ११)_

*कृष्ण भुलिया जीव, भोग-वाञ्छा करे।*

*पाशते माया, तारे झापटिया धरे॥*

*राखे कृष्णा, मारे के।*

*मारे कृष्णा, राखे के॥*

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