03/11/24, 12:36 pm - Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *Pastimes of (Lord) Damodar.*

Highlights from the discourse of *His Holiness Srila Nava Yogendra Swamiji Maharaj*

*Morning sermon.*

Date: *November 1st, 2024, ISKCON Goshala, Sri Vrindavan Dham.*

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(Lord Sri) Krishna is our mother, father, wealth, and life.*

Today is Deepawali (Diwali), and Damodar Leela also transpired.

*One must take refuge in Lord Sri Krishna. A devotee should serve The Lord without any expectation (not wanting anything in return). One should serve The Lord without seeking anything in return. One must worship (Lord Sri) Krishna only.*

(Lord Sri) Ram Ji incarnated to destroy the evil Ravan.

*Everyone is making progress on the path of death, but one must progress on the path of devotion.*

*One is born in a human body only to achieve God-realization.*

*One neither wants lakhs or crores nor thousands.*

      *The only need is Your love, Shyam ji, Krishan ji.*

*Everything about a dirty mind is useless.*

      *Harinam is the essence.*

      *Mahaprabhu is the foundation.*

*Chant so much that you cross your limits.*

*That Yamraj also cancels his account.*

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12/11/24, 2:51 pm - Dr. Madhu Priya Prbuji Iskcon Udhampur: *भौतिक जगत एक किला है।*

*परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज* के प्रवचन से मुख्य अंश

*सुबह का प्रवचन।*

दिनांक:- *नवंबर 10, 2024, केशव कुंज, श्री वृन्दावन धाम।*

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यह भौतिक जगत एक किला है। हम सब अपराधी हैं, इसलिए हमें इसमें रखा गया है। हमें इस किले से बाहर निकलना है।

*जब हम भगवान श्रीकृष्ण की शरण में जाएंगे, तभी हम इस आवागमन के चक्कर से बाहर निकल सकते हैं।*

यह जगत दुखों का घर है। हम अज्ञानता के कारण इस दुखरूपी संसार में सुख की खोज कर रहे हैं, और हमेशा यहाँ रहना चाहते हैं। एक दिन हम सबको यहाँ से निकाल दिया जाएगा।

*भगवान बहुत दयामय हैं, और इस भौतिक जगत में हर युग में प्रकट होते हैं। गौर-निताई कलियुग के अवतार हैं।*

*चैतन्य महाप्रभु ने (राधा भाव में) भक्त की भूमिका निभाई। भगवान को बहुत आनंद आया, और उन्होंने देव-दुर्लभ कृष्ण-प्रेम का खजाना हमारे लिए खोल दिया। चैतन्य महाप्रभु हमारा उद्धार करने के लिए आए हैं, इसलिए हमें उनकी शरण लेनी है।*

हमारा मन मलिन है, और हमारा बहुत बड़ा शत्रु है। यह मन हमेशा हमें बुराइयों की तरफ ले जाता है। हमें अपने मन को शुद्ध करना है।

*हमें मनुष्य जीवन केवल भगवद्-प्राप्ति के लिए मिला है।*

*यह (हरे कृष्ण महामंत्र का) संकीर्तन-आंदोलन मानवता का परम कल्याणकारी है, क्योंकि यह वर्षों से संचित मल से चित्त का मार्जन करने वाला, तथा बारंबार जन्म-मृत्यु रूप महादावानल को शांत करने वाला है।*

*हमें अपराधों से मुक्त होकर कृष्ण का नाम लेना है। इस कलियुग रूपी भावसागर को पार करने के लिए नाम-जप से अलावा कोई और साधन नहीं है। हमें हर परिस्थिति में भगवान का नाम-जप करना चाहिए।*

*नींद निशानी मौत की, उठ कबीरा जाग।*

*और रसायन छांड़ि के, नाम रसायन लाग॥*

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पूरा प्रवचन यहाँ पर देखें: