Once the Hell (Netherworld) Became Empty | एक बार नरक खाली हो गए
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏जप वार्तादिनांक: जून 14, 2025, लाडली कुंज, वृंदावन मुख्य प्रवचन बिंदु श्लोक और प्रेरक विचार Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj 🙏Japa TalkDate: June 14th, 2025, Ladali Kunj, Vrindavan Key Teachings Scriptures & Reflections 📲 […]
One Should Pray to Gurudev with Humility | गुरुदेव से विनम्रता की प्रार्थना करनी चाहिए।
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏मंगल आरती प्रवचनदिनांक: जून 11, 2025, मॉरीशस मुख्य प्रवचन बिंदु श्लोक और विचार Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj 🙏Mangal Aarti SermonDate: June 11th, 2025, Mauritius Key Takeaways Verses and Reflections 📲 Join Our WhatsApp […]
The Pastime of the Appearance of Mother Ganga | गंगा मैया के प्राकट्य की कथा
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏संध्याकालीन सत्संगदिनांक: जून 7, 2025, मॉरीशस मुख्य प्रवचन बिंदु 👉 काम एष … वैरिणम्॥ (गीता 3.37) 👉 अन्तकाले … नास्त्यत्र संशयः॥ (गीता 8.5) 👉 मन एव … निर्विषयं स्मृतम्॥ (ब्रह्मबिन्दूपनिषद् 2) 👉 कृते … कलौ तद्धरिकीर्तनात्॥ (भागवत 12.3.52) 👉 नायं देहो … […]
Humility is the Jewel of a Vaishnava | विनम्रता वैष्णव का गहना है।
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏मंगल आरती प्रवचनदिनांक: जून 5, 2025, मॉरीशस 👉 स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।अहैतुकीअप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति॥(श्रीमद्भागवत महापुराण १.२.६) 👉 कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं साङ्गोपाङ्गास्त्रपार्षदम्।यज्ञै: सङ्कीर्तनप्रायैर्यजन्ति हि सुमेधस:॥(श्रीमद्भागवत महापुराण ११.५.३२) 👉 यारे देख, तारे कह ‘कृष्ण’ – उपदेश।आमार आज्ञाय गुरु हञा तार’ एइ देश॥(चैतन्य […]
How Does One Escape From Mental Domination (Unruliness)? | मन की अधीनता से कैसे निकला जाए?
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏मंगल आरती प्रवचनदिनांक: जून 3, 2025, मॉरीशस 👉 रामहि केवल प्रेम पियारा। जानि लेहु जो जान निहारा॥(श्री रामचरितमानस, अयोध्याकाण्ड, चौपाई) 👉 कृष्ण-बहिरमुख हना भोग वाञ्छा करे।निकटस्थ माया तारे जपतिया धरे॥(श्री श्री प्रेम-विवर्त ६.२) 👉 भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वत:ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते […]
Does The Lord Eat? | क्या भगवान खाते हैं?
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏रविवारीय सत्संगदिनांक: जून 1, 2025, मॉरीशस 👉 दो बातन को भूल मत, जो चाहत कल्याण।नारायण इक मौत को, दूजे कृष्ण भगवान।। 👉 अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्।य: प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशय:॥(भगवद गीता 8.5) 👉 सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तय: सम्भवन्ति या:तासां ब्रह्म […]
Description of Goloka Dham | गोलोक धाम का वर्णन।
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏जप वार्तादिनांक: मई 25, 2025, केशव कुंज, श्री वृन्दावन धाम हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए: +91-90860-06726 पर ADD लिखकर भेजें। धन्यवाद 🙏 पूरा प्रवचन यहाँ पर देखें: Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj […]
The Pastimes of Sant Haripal | संत हरिपाल की कथा।
परम पूज्य श्रील नव योगेन्द्र स्वामी जी महाराज के प्रवचन से मुख्य अंश 🙏मंगल आरती प्रवचनदिनांक: मई 18, 2025, इस्कॉन उधमपुर हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए: +91-90860-06726 पर ADD लिखकर भेजें। धन्यवाद 🙏 पूरा प्रवचन यहाँ पर देखें: Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj 🙏Mangal Aarti […]
Sri Caitanya Mahaprabhu is the composite form of Sri Radha and Sri Krishna | श्री चैतन्य महाप्रभु राधा कृष्ण का मिलित रूप हैं
Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj 🙏 Mangal Aarti Sermon Date: May 17th, 2025, ISKCON, Udhampur This world is not home to anyone. One has a relationship with The Lord Sri Krishna. Everyone should look upon all women as mothers. Verses and Reflections: Lord Krishna, the son of […]
Only a devotee can recognize another devotee | भक्त ही भक्त को पहचान सकता है।
Highlights from the discourse of His Holiness Srila Nava Yogendra Swami ji Maharaj 🙏 Mangal Aarti Sermon Date: May 16th, 2025, ISKCON, Udhampur Key Points: One has to purify one’s existence, and purity will come by becoming devout. One should associate with saints. One can achieve all accomplishments with even a little association with saints. […]